शुक्रवार, ३० नोव्हेंबर, २०१२

उत्कट...!

 
बोलणे म्हणजे संवाद नव्हे
 
सहवास साथ होत नाही...
 
सूज्ञ समंजस जाणीवेला
 
उत्कट मौनही अर्थवाही...!

गुरुवार, २९ नोव्हेंबर, २०१२

विहंग...!

 
केकाटते लपविण्या भिती,
 
भ्रमित टोळी वटवाघुळांची
 
तो गरुड विहंग-विहारी 
 
मोजतो उंची आभाळांची...!

बुधवार, २८ नोव्हेंबर, २०१२

स्वसंवादी...!

 
संमिश्र या जगण्याची असाध्य ही कला,
 
संदर्भांच्या अवकाशात विभ्रम विसंवादी...
 
मुक्यांच्या कोलाहलात एकांत कावलेला,
 
रीतीच्या उपचारात निर्मम स्वसंवादी...!

सोमवार, २६ नोव्हेंबर, २०१२

जन्मखूण...!

 
दु:खाची भुणभुण
 
सुखाची रुणझुण
 
नि:संग विरक्तीला
 
छळणारी जन्मखूण...!

शनिवार, २४ नोव्हेंबर, २०१२

अमूर्त...!

 
ओथंबल्या श्वासास बिलगून
 
जगतो उन्मनी झुरण्यात
 
कसे समजावे मर्त्य जगाला
 
काय सुख अमूर्त उरण्यात...!

सोमवार, १९ नोव्हेंबर, २०१२

स्फुल्लिंग...!

 
स्फुल्लिंग पोचता नभी
 
आकाशही भगवे झाले
 
मेघांचे करूण हास्य
 
सूर्यबिंबात निमाले...!

रविवार, १८ नोव्हेंबर, २०१२

अनाथ...!

 
...मर्मग्राही दृष्टी अमोघ वाणी
 
विचक्षण वृत्ती निर्भीड बाणा
 
अनाथ करुनी मराठी मनाला
 
निघोनी गेला एक वाघ ढाणा...

मंगळवार, १३ नोव्हेंबर, २०१२

स्वर्गीय...!

 
पहाटवारा
तेल-उटण्याचा सुगंध
सनईचे सूर... भूपाळीचे
 
मखमली स्पर्श
स्वर्गीय अभ्यंग
अलवार तनमन... नव्हाळीचे
 
सौख्याची चाहूल
लक्ष्मीचे पाऊल
तोरण आंब्याच्या... डहाळीचे
 
रांगोळीसवे
झेंडूच्या माळा
मनी फुले बन... बकुळीचे

सोमवार, १२ नोव्हेंबर, २०१२

स्वसंवेद्य...!

 
तर्कांच्या पोकळ भेंडोळयात
 
जाणिवेचे खुपणारे टोक
 
भातुकली सांभाळता
 
स्व-संवेदनेला भोक...!

शुक्रवार, ९ नोव्हेंबर, २०१२

मुक्ती...!

 
रक्तात माझ्या अंगार पेटलेला
 
प्रज्ञेला माझ्या पण बुद्ध भेटलेला
 
अर्जुनाची जात माझी कर्णाची नाळ
 
मुक्तीच्या आसक्तीत मी जन्म रेटलेला...!

गुरुवार, ८ नोव्हेंबर, २०१२

गांधारी...!

 

कृतघ्न स्वकेंद्री क्षुद्रांची

लक्ष्मी दरबारी प्रभावळ

श्रेयस आणि प्रेयस त्यांचेच

पोटार्थी गांधारी भुतावळ...!

मंगळवार, ६ नोव्हेंबर, २०१२

तत्व...!

 
पंचमहाभूतांचा अविष्कार
 
भंगुर जगाचा व्यवहार
 
देह त्यागता साकार
 
निरामय आत्मा उरे... 
 
चिरंतन न अवतार
 
क्षतीविन नाही संभार
 
आकळता तत्वविचार
 
पार्थिव निर्जीव नुरे...!

रविवार, ४ नोव्हेंबर, २०१२

नफ्फड...!

 
आमच्या आडमुठेपणाची
 
नाही आम्हाला लाज...
 
क्षुद्रतेचा आमच्या
 
आम्हाला नफ्फड  माज...!

शनिवार, ३ नोव्हेंबर, २०१२

कापूर...!

 
पेटण्याचे दु:ख नाही
 
विझण्याचे भाग्य नाही
 
आरती नित्य कापूराला
 
भक्क फुलतांना पाही...!

शुक्रवार, २ नोव्हेंबर, २०१२

जगरहाटी...!

 
अंध अवलोकन
 
भ्रष्ट अनुमोदन
 
पंगु लांगुलचालन
 
वाटा-घाटी...
 
 
नीतीहीन जन
 
सचोटीवीन धन
 
विवेकशून्य मन
 
जगरहाटी...!